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महात्मा गांधी की जीवनी | अहिंसा के पुत्र से भारत के बापू तक – पूरी कहानी हिंदी में | Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay

Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay गांधी जी का जीवन परिचय Gandhi Ji Ka Jivan Parichay नमस्कार दोस्तों Mahatma Gandhi biography in hindi आज हम बात करंगे।

कल्पना कीजिए, एक ऐसा इंसान जो नंगे पैर दुनिया को ललकारा, अंग्रेजों को बिना हथियार के हराया, और अहिंसा से भारत को आजादी दिलाई – वो हैं महात्मा गांधी, जिन्हें हम प्यार से बापू कहते हैं!

gandhi ji ka janm kab hua tha? 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर के छोटे से घर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने कभी सोचा नहीं था कि उनकी सादगी दुनिया बदल देगी।

लंदन की चमक-दमक छोड़कर दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव से लड़े, नमक सत्याग्रह से ब्रिटिश राज हिलाया, और चरखे की धुन पर स्वदेशी का जादू बिखेरा।

लेकिन उनकी जिंदगी सिर्फ संघर्ष की नहीं – कस्तूरबा के साथी, चार बेटों के पिता, और “हिंद स्वराज” जैसे अमर ग्रंथों के रचयिता।

30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे की गोलियों ने उन्हें छीन लिया, लेकिन उनकी अहिंसा की लौ आज भी जल रही है – मार्टिन लूथर किंग से मलाला तक, सब प्रेरित!

इस बायोग्राफी में जानिए गांधीजी के बचपन के राज़, दांडी यात्रा के अनछुए किस्से, जेल यातनाओं की कहानी, और *आज के भारत पर उनका असर।

अगर आप प्रेरणा ढूंढ रहे हैं, तो ये पोस्ट आपके लिए है। स्क्रॉल करें, पढ़ें, और कमेंट में बताएं – बापू से क्या सीखा? जय हिंद!

महात्मा गांधी जी के जीवन परिचय के बारे में और Mahatma Gandhi Biography In Hindi के बारे में। शुरू आत में Short Biography जानेंगे और उसके आगे उनके जीवन के बारे में आपको सभी जानकारी देंगे।

Table of Contents

Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay

क्र.सं.विवरण (Field)जानकारी (Details)
1पूरा नाममोहनदास करमचंद गांधी
2अन्य नामबापू, राष्ट्रपिता, महात्मा
3जन्म तिथि2 अक्टूबर, 1869
4जन्म स्थानपोरबंदर, गुजरात
5पिता का नामकरमचंद गांधी
6माता का नामपुतलीबाई
7पत्नी का नामकस्तूरबा गांधी
8शिक्षाबैरिस्टर (कानून की पढ़ाई), यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन
9प्रमुख सिद्धांतसत्य, अहिंसा और सत्याग्रह
10प्रमुख आंदोलनचंपारण, असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो आंदोलन
11आत्मकथासत्य के प्रयोग (My Experiments with Truth)
12प्रसिद्ध नारा‘करो या मरो’ (Do or Die)
13राजनीतिक गुरुगोपाल कृष्ण गोखले
14सम्मानरवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘महात्मा’ की उपाधि दी
15निधन30 जनवरी, 1948 (नई दिल्ली)
Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay
Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay

Mahatma Gandhi biography in hindi

Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay वे एक ऐसे महान व्यक्तित्व थे जो हमेशा अहिंसा के मार्ग पर चलते थे और दूसरों को भी इसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते थे।” भारत के इतिहास में Mahatma Gandhi का नाम आदर के साथ लिया जाता है।

उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहकर सम्मानित किया गया है उन्हें सभी प्यार से बापू भी कहते है उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 ई. को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था उनके पिता करमचंद गाँधी राजकोट रियासत में दिवान थे।

उनकी माता पुतलीबाई धार्मिक विचारो की महिला थी भारत में हाई स्कूल शिक्षा पास करने के बाद वे इंग्लैंड में वकालत की पढ़ाई करने गए।

वहाँ से वह बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें दक्षिण अफ़्रीका जाना पड़ा। वहाँ भारतीयों पर अंग्रेजो के अत्याचार देखकर उनका हृदय द्रवित हो उठा।

उन्होंने अंग्रेज सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाया। अफ्रीका से भारत लौटने पर उन्होंने अपना जीवन देश – सेवा में लगा दिया। उन्होंने स्वंत्रता – आंदोलन का नेतृत्व किया और कई बार जेल गए।

उन्होंने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया तथा असहयोग आंदोलन चलाया।

शार्ट कट परिचय | mahatma gandhi ke aarambhik jivan ka sankshipt vivaran den

जन्म और परिवार

पूरा नाम: मोहनदास करमचंद गांधी।

जन्म: 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।

माता-पिता: उनके पिता करमचंद गांधी राजकोट के दीवान थे और उनकी माता पुतलीबाई एक अत्यंत धार्मिक महिला थीं। गांधी जी के चरित्र पर उनकी माता के धार्मिक विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा।

शिक्षा (Education)

स्कूली शिक्षा: गांधी जी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में हुई। वे बचपन में बहुत शर्मीले थे और औसत छात्र माने जाते थे।

उच्च शिक्षा: 1888 में वे कानून (वकालत) की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड चले गए। वहां उन्होंने ‘इनर टेम्पल’ से अपनी वकालत की डिग्री पूरी की और 1891 में भारत वापस लौटे।

विवाह और प्रारंभिक संघर्ष

विवाह: उनका विवाह मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में कस्तूरबा गांधी से कर दिया गया था।

सत्य के प्रति झुकाव: बचपन में ‘श्रवण कुमार’ और ‘राजा हरिश्चंद्र’ के नाटकों ने उनके मन पर गहरी छाप छोड़ी, जिससे उन्होंने जीवन भर सत्य और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

दक्षिण अफ्रीका की यात्रा (एक महत्वपूर्ण मोड़)

1893 में एक केस के सिलसिले में गांधी जी दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ उन्हें रंग-भेद (Racial Discrimination) का सामना करना पड़ा। जब उन्हें ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से बाहर फेंक दिया गया, तो उस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। यहीं से उन्होंने अन्याय के खिलाफ ‘सत्याग्रह’ (सत्य का आग्रह) का पहला प्रयोग शुरू किया।

विशेष नोट: गांधी जी का मानना था कि “सत्य ही ईश्वर है” और उन्होंने अपने प्रारंभिक अनुभवों को अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ (My Experiments with Truth) में विस्तार से लिखा है।

महात्मा गांधी की शिक्षा और लंदन का सफर (Education & Journey to London)

गांधी जी की शिक्षा और बैरिस्टर बनने का सफर गांधी जी की शुरुआती शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में हुई। इसके बाद, साल 1888 में वे वकालat की पढ़ाई करने के लिए लंदन (England) चले गए।

वहां उन्होंने ‘Inns of Court School of Law’ से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की। लंदन में रहते हुए उन्होंने न केवल कानून सीखा, बल्कि शाकाहार और पश्चिमी संस्कृति को भी करीब से समझा।

दक्षिण अफ्रीका का वह किस्सा जिसने गांधी को ‘महात्मा’ बनाया

दक्षिण अफ्रीका: वो ट्रेन कांड जिसने गांधी जी को बदल दिया 7 जून 1893 को दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्सबर्ग (Pietermaritzburg) स्टेशन पर गांधी जी के साथ एक ऐसी घटना हुई जिसने इतिहास बदल दिया।

प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद, उन्हें उनके रंग के कारण ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था। इसी अपमान ने उन्हें नस्लभेद के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा दी और यहीं से उनके ‘सत्याग्रह’ की शुरुआत हुई।

गांधी जी की प्रमुख पुस्तकें (Famous Books)

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महात्मा गांधी द्वारा लिखी गई प्रमुख पुस्तकें गांधी जी एक महान लेखक भी थे। उनके द्वारा लिखी गई कुछ प्रसिद्ध पुस्तकें नीचे दी गई हैं:

  1. सत्य के प्रयोग (My Experiments with Truth): यह गांधी जी की आत्मकथा (Autobiography) है।
  2. हिंद स्वराज (Hind Swaraj): इसमें उन्होंने आधुनिक सभ्यता और स्वराज्य पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।
  3. मेरे सपनों का भारत (India of My Dreams): भारत के भविष्य को लेकर उनके विजन की किताब।

Gandhi Ji Ka Jivan Parichay In Hindi

गाँधी जी ने 1942 ई. में ‘अंग्रेजो! भारत छोड़ो’ का नारा दिया। उनके अथक प्रयत्नों से 15 अगस्त, 1947 ई. को देश स्वतंत्र हुआ। गाँधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे।

वे भारत में ‘रामराज्य’ लाना चाहते थे। 30 जनवरी, 1948 ई. को नाथूराम विनायक गोड से ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

आज भी भारतीयों के दिलों में उनकी यादें जीवित है हमें उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर देश को ऊँचा उठाने का प्रयत्न करना चाहिए।

Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay
Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay – Mahatma Gandhi Ji Ka Jivan Parichay

Mahatma Gandhi Jivan Parichay Full Summary

महात्मा गांधी, मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से, (जन्म 2 अक्टूबर, 1869, पोरबंदर, भारत में – मृत्यु 30 जनवरी, 1948, दिल्ली में), भारतीय वकील, राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, और लेखक जो राष्ट्रवादी आंदोलन के खिलाफ नेता बने भारत का ब्रिटिश शासन।

जैसे, उन्हें अपने देश का पिता माना जाने लगा। गांधी को राजनीतिक और सामाजिक प्रगति हासिल करने के लिए अहिंसक विरोध (सत्याग्रह) के अपने सिद्धांत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाता है।

अपने लाखों साथी भारतीयों की नज़र में, गांधी महात्मा (“महान आत्मा”) थे उनके दौरों के दौरान उन्हें देखने के लिए एकत्रित हुई भारी भीड़ की अविचलित आराधना ने उन्हें एक गंभीर परीक्षा बना दिया।

वह मुश्किल से दिन में काम कर पाता था और न ही रात में आराम कर पाता था। “महात्माओं के संकट,” उन्होंने लिखा, “केवल महात्माओं के लिए जाना जाता है।”

उनकी ख्याति उनके जीवनकाल में ही दुनिया भर में फैल गई और उनकी मृत्यु के बाद ही बढ़ी। महात्मा गांधी नाम अब पृथ्वी पर सबसे अधिक मान्यता प्राप्त नामों में से एक है।

Gandhi Ka Jivan Parichay
Gandhi Ka Jivan Parichay – Mahatma Gandhi Ji Ka Jivan Parichay

Sojourn in England and return to India of Mahatma Gandhi

Sojourn in England and return to India of Mahatma Gandhi In Hindi गांधी ने अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लिया और लंदन विश्वविद्यालय की मैट्रिक की परीक्षा देकर अपनी अंग्रेजी और लैटिन पर ब्रश करने की कोशिश की।

लेकिन, तीन वर्षों के दौरान उन्होंने इंग्लैंड में बिताया, उनका मुख्य ध्यान शैक्षणिक महत्वाकांक्षाओं के बजाय व्यक्तिगत और नैतिक मुद्दों के साथ था।

राजकोट के आधे-ग्रामीण वातावरण से लंदन के महानगरीय जीवन में परिवर्तन उनके लिए आसान नहीं था।

पश्चिमी खान-पान, पहनावे और शिष्टाचार को अपनाने के लिए जब वह दर्द से संघर्ष कर रहा था, तो उसे अटपटा लग रहा था। उनका शाकाहार उनके लिए लगातार शर्मिंदगी का कारण बना।

उसके दोस्तों ने उसे चेतावनी दी कि यह उसकी पढ़ाई के साथ-साथ उसके स्वास्थ्य को भी बर्बाद कर देगा।

उनके लिए सौभाग्य से, वे एक शाकाहारी रेस्तरां के साथ-साथ शाकाहारवाद की एक तर्क पूर्ण रक्षा प्रदान करने वाली एक पुस्तक लेकर आए।

जो अब से उनके लिए विश्वास का विषय बन गया, न कि केवल उनकी वैष्णव पृष्ठभूमि की विरासत।

शाकाहार के लिए उन्होंने जो मिशनरी उत्साह विकसित किया, उसने दयनीय रूप से शर्मीले युवाओं को अपने खोल से बाहर निकालने में मदद की और उन्हें एक नया संतुलन दिया।

वे लंदन वेजीटेरियन सोसाइटी की कार्यकारी समिति के सदस्य बने, इसके सम्मेलनों में भाग लिया और इसकी पत्रिका में लेखों का योगदान दिया।

इंग्लैंड के बोर्डिंग हाउस और शाकाहारी रेस्तरां में, गांधी न केवल खाने के शौकीन बल्कि कुछ ईमानदार पुरुषों और महिलाओं से मिले, जिनके लिए उन्होंने बाइबिल और इससे भी महत्वपूर्ण बात, भगवद्गीता का परिचय दिया, जिसे उन्होंने पहली बार अंग्रेजी अनुवाद में पढ़ा था।

सर एडविन अर्नोल्ड. भगवद्गीता (आमतौर पर गीता के रूप में जाना जाता है) महान महाकाव्य महाभारत का हिस्सा है और एक दार्शनिक कविता के रूप में, हिंदू धर्म की सबसे लोकप्रिय अभिव्यक्ति है।

महात्मा गांधीइं ग्लैंड में प्रवास करें और भारत लौटें

महात्मा गांधीइं ग्लैंड में प्रवास करें और भारत लौटें अंग्रेजी शाकाहारी एक प्रेरक भीड़ थे।

उनमें एडवर्ड कारपेंटर, “ब्रिटिश थोरो” जैसे समाजवादी और मानवतावादी शामिल थे फैबियन जैसे जॉर्ज बर्नार्ड शॉ और एनी बेसेंट जैसे थियोसोफिस्ट।

उनमें से अधिकांश आदर्शवादी थे काफी कम विद्रोही थे जिन्होंने दिवंगत-विक्टोरियन प्रतिष्ठान के प्रचलित मूल्यों को खारिज कर दिया।

पूंजीवादी और औद्योगिक समाज की बुराइयों की निंदा की, सरल जीवन के पंथ का प्रचार किया, और भौतिक मूल्यों पर नैतिकता की श्रेष्ठता और संघर्ष पर सहयोग की श्रेष्ठता पर जोर दिया।

वे विचार गांधी के व्यक्तित्व को आकार देने और अंततः उनकी राजनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले थे।

जुलाई 1891 में भारत लौटने पर गांधी के लिए दर्दनाक आश्चर्य की स्थिति थी। उनकी अनुपस्थिति में उनकी मां की मृत्यु हो गई थी, और उन्होंने अपने निराशा के बारे में पता लगाया कि बैरिस्टर की डिग्री एक आकर्षक कैरियर की गारंटी नहीं थी।

कानूनी पेशा पहले से ही भीड़भाड़ वाला होने लगा था, और गांधी इसमें अपनी जगह बनाने के लिए बहुत संकोची थे।

पहले ही संक्षेप में उन्होंने बंबई (अब मुंबई) की एक अदालत में तर्क दिया, उन्होंने एक खेदजनक आंकड़ा काट दिया।

बॉम्बे हाई स्कूल में एक शिक्षक की अंशकालिक नौकरी के लिए भी ठुकरा दिया गया, वह वादियों के लिए याचिकाएँ बनाकर एक मामूली जीवन यापन करने के लिए राजकोट लौट आया।

यहां तक ​​कि वह रोजगार भी उनके लिए बंद कर दिया गया जब उन्हें एक स्थानीय ब्रिटिश अधिकारी की नाराजगी का सामना करना पड़ा।

इसलिए, यह कुछ राहत के साथ था कि 1893 में उन्होंने नेटाल, दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय फर्म से एक साल के अनुबंध के गैर-आकर्षक प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

Mahatma Gandhi 10 Lines in Hindi (Quick Summary)

पूरा नाम: महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।

जन्म: उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।

उपाधि: उन्हें पूरी दुनिया ‘राष्ट्रपिता’ और ‘बापू’ के नाम से जानती है।

शिक्षा: गांधी जी ने इंग्लैंड से वकालत (Law) की पढ़ाई पूरी की थी।

सत्याग्रह: उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ अपना पहला सत्याग्रह शुरू किया।

अहिंसा का मार्ग: गांधी जी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे और उन्होंने इसी रास्ते पर चलकर आजादी की लड़ाई लड़ी।

प्रमुख आंदोलन: उन्होंने असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन का सफल नेतृत्व किया।

नारा: उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान “करो या मरो” का प्रसिद्ध नारा दिया था।

सादगी: बापू हमेशा सादे कपड़े पहनते थे और खुद चरखे पर सूत कातकर स्वदेशी का संदेश देते थे।

निधन: 30 जनवरी 1948 को उनकी मृत्यु हुई, जिसे भारत में ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion):

“महात्मा गांधी का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर किसी भी बड़ी मुश्किल का सामना किया जा सकता है। उन्होंने न केवल भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराया, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सादगी का पाठ भी पढ़ाया। आज के इस आधुनिक युग में भी बापू के विचार और उनके सिद्धांत हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक हैं। ह

में उम्मीद है कि ‘Jivan Parichay’ पर दी गई महात्मा गांधी जी की यह जीवनी और उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। अगर आपको यह लेख पसंद आया हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर साझा करें।”

faq: Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay

Q. :- 1. महात्मा गांधी जी ने कौन सा नारा दिया था?

Ans. :- सन 1942 में गाँधी जी ने ‘भारत छोड़ो’ का नारा दिया जो भारत में ब्रिटिश शासन के अंत का संकेत था।

Q. :- 2. गांधी का आदर्श वाक्य क्या था?

Ans. :- ऐसे जियो जैसे कि तुम कल मरने वाले हो। ऐसे सीखो जैसे कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो ।”

Q. :- 3. गांधी जी का पहला नारा कौन सा था?

Ans. :- अपनी स्पीच में गांधीजी ने लोगों को एक नारा दिया था। यह नारा ‘करो या मरो’ था।

Q. :- 4. भारत का मुख्य नारा क्या है?

Ans. :- ” सत्य की ही जीत होती है “

Q. :- 5. गांधी जी की हत्या किसने की थी?

Ans. :- नाथूराम गोडसे ने 3 गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

Q. :- 6. महात्मा गांधी का जन्म स्थान है?

Ans. :- भारत के गुजरात राज्य के पोरबंदर क्षेत्र।

Q. :- 7. 2 अक्टूबर 1869 को कौन सा दिन था?

Ans. :- महात्मा गांधी का जन्म और 2 अक्टूबर 1869 को दिन शनिवार है।

Q. :- 8. गांधी जयंती पर क्या बंद रहता है?

Ans. :- देश भर के स्कूल बंद रहते हैं।

Q. :- 9. gandhi ji ka janm kab hua tha?

Ans. :- gandhi ji ka janm 2 अक्टूबर 1869 hua tha

Q. :- 10. गांधी जी का पूरा नाम?

Ans. :- गांधी जी का पूरा नाम

गांधी जी का जीवन परिचय हिंदी में pdf

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दोस्तों आपको Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay – गांधी जी का जीवन परिचय ये पोस्ट कैसी लगी। हमें comment करके अपने विचार दे। हमें बहुत ख़ुशी होगी। इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ Share ज़रूर करें।

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एक समर्पित हिंदी कंटेंट राइटर और ब्लॉगर हैं। वे JIVAN PARICHAY के संस्थापक हैं, जहाँ वे महान व्यक्तित्वों के जीवन परिचय, जीवनी, हिंदी साहित्य और शैक्षिक लेख सरल व भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों और पाठकों को सटीक, उपयोगी और फ्रेंडली जानकारी उपलब्ध कराना है।

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