tulsidas का जीवन परिचय goswami tulsidas ka jivan parichay गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के ऐसे महान कवि और संत थे, जिनकी रचनाओं ने भारतीय समाज को धर्म, भक्ति और नैतिकता की दिशा दिखाई।
वे रामभक्ति परंपरा के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं और उनकी अमर कृति रामचरितमानस आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का मार्गदर्शन करती है।
तुलसीदास ने संस्कृत के कठिन ग्रंथों को अवधी भाषा में सरल रूप देकर आम जनमानस तक पहुँचाया, जिससे भक्ति आंदोलन को नई गति मिली।
माना जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म 16वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनका बचपन अनेक कष्टों में बीता, लेकिन गुरु कृपा और प्रभु राम की भक्ति ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी।
तुलसीदास जी का संपूर्ण जीवन त्याग, साधना और लोककल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से समाज में व्याप्त अज्ञान, पाखंड और अनैतिकता पर प्रहार किया।
आज भी तुलसीदास का जीवन परिचय विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं और साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस लेख में हम उनके जीवन, विचारों और साहित्यिक योगदान को सरल भाषा में समझने का प्रयास करेंगे।
गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय | Tulsidas Ka Jivan Parichay
गोस्वामी तुलसीदास न केवल राम काव्य के अपितु संपूर्ण हिंदी काव्य के श्रेष्ठ कवि है। वह एक कवि आलोचक दर्शनिक लोक नायक समाज सुधारक भगत एवं उच्च कोटि के विद्वान हैं।
उन्हें विश्वकवि कहना भी अनुचित न होगा उनका जन्म समय 1532 में बांदा जिला (उत्तर प्रदेश) के राजापुर गांव में हुआ कुछ विद्वान उनका जन्मस्थान सोरों भी बनाते हैं।
उन्होंने अपना बचपन अत्यंत परिस्थितियों में बिताया। बचपन में उनका अपने माता पिता से बिछोह हो गया और अत्यंत कठिनाइयों में अपना जीवन यापन किया।
अचानक उनकी बैंट स्वामी नरहरिदास से हुई वे इन्हें अयोध्या ले गए उन्हें राम मंत्र की दीक्षा दी और विध्याध्यान करने लगे।
तत्पश्चात तुलसी ने काशी में शेष सनातन जी के पास रहकर 15 वर्षों तक वेदों का अध्ययन किया।
सन 1623 में काशी में श्रावण शुक्ला रिया को अस्सी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम राम करते हुए अपना शरीर त्याग दिया।
| पूर्ण नाम (Full Name) | गोस्वामी तुलसीदास |
| जन्म तिथि (Date of Birth) | सन् 1532 ई. (कुछ विद्वान 1511 ई. भी मानते हैं) |
| जन्म स्थान (Place of Birth) | राजापुर, चित्रकूट (वर्तमान उत्तर प्रदेश, भारत) |
| माता का नाम (Mother’s Name) | हुलसी देवी |
| पिता का नाम (Father’s Name) | आत्माराम दुबे |
| राष्ट्रीयता (Nationality) | भारतीय |
| शिक्षा (Education) | संस्कृत, वेद, पुराण, दर्शन एवं धर्मशास्त्र का अध्ययन |
| मृत्यु तिथि (Date of Death) | सन् 1623 ई. |
| विवाह/साथी (Spouse/Partner) | रत्नावली |
| पुरस्कार/सम्मान (Awards/Honors) | आधुनिक अर्थों में पुरस्कार नहीं; भारत के महान संत-कवि के रूप में प्रतिष्ठा |
| प्रमुख उपलब्धि (Major Achievement) | रामचरितमानस की रचना; रामभक्ति आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया |
| पेशा/व्यवसाय (Occupation) | संत, कवि, समाज सुधारक |

Tulsidas Ji Ka Jivan Parichay Or Tulsidas Ki Rachna | गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रमुख रचनाए
अब तक तुलसीदास के नाम से 36 रचनाएं प्राप्त हुई है किंतु वे सब प्रमाणिक नहीं है उनमें से प्रमाणिक रचनाएं निम्नलिखित हैं –
“दोहावली”, “कवितावली”, “श्री कृष्ण गीतावली”, “गीतावली” “विनय पत्रिका”,”रामचरितमानस”, “रामलला नहछू”, ‘बरवै रामायण”, “वैराग्य संदीपनी”, “पार्वती मंगल”, “जानकी मंगल’ और “रामाज्ञा प्रश्न”
इनमें “रामचरितमानस”, “रामलला नहछू”, “पार्वती मंगल” तथा “जानकी मंगल” प्रबंध काव्य हैं “गीतावली”, “श्री कृष्ण गीतावली” और “विनय पत्रिका” गीती काव्य है और अन्य रचनाएं मुक्तक काव्य है।
“रामचरितमानस” तुलसी का ही नहीं बल्कि समूचे हिंदी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है इसे “भारत की बाइबल” भी कहा गया है।
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Goswami Tulsidas Ka Jivan Parichay | काव्यगत विशेषता
तुलसीदास के काव्य की प्रमुख विशेषताए निम्नलिखित है –
(1) विषय की व्यापकता :- महाकवि तुलसीदास ने अपने युग का गहन एवं गम्भीर अध्ययन किया था। तुलसीदास ने जीवकन के सभी पक्षों को अपने काव्य में स्थान दिया है
उनके काव्य में धर्म दर्शन संस्कृति भक्ति काव्य कला आदि सभी का सुंदर समन्वय हुआ है। विभिन भावो और सभी रसों को उनकी रचनाओं में स्थान मिला है ।
(2) राम का स्वरूप :- महाकवि तुलसीदास ने अपने काव्य में राम को विष्णु का अवतार मानते हुए उनके सगुन एंव निगुण दोनो रूपो का वर्णन किया है।
उन्होंने राम को धर्म का रक्षक और अधर्म का विनाश करने वाला माना है उन्होंने राम के चरित्र के शील, सोंदर्य एंव शक्ति का समन्वय प्रस्तुत किया है। उन्हीने राम की आराधना दास्य भाव से की है ।
(3) समन्वय की भावना :- तुलसीदास के काव्य में समन्वय की भावना का अदभुत चित्रण हुआ है।
उन्होंने शैवों और वैष्णवो,शाक्तों और ज्ञान तथा कर्म के धार्मिक समन्वय के साथ सामाजिक, भाषा क्षेत्र तथा साहित्य क्षेत्र में सारगृहिनी प्रतिभा और समन्वयात्मकता का परिचय दिया है।
(4) प्रकृति चित्रण :- तुलसीदास ने प्रकृति का अत्यंत मनोरम चित्रण किया है। तुलसी काव्य में प्रकृति के विभिन रूपो का चित्रण किया है।
उनके काव्य में वन, नदी, पवर्त, वृक्ष, पशु-पक्षी आदि के विस्तृत वर्णन मिलते है। प्रकृति चित्रण के साथ साथ तुलसी उपदेश भी देते है।
(5) भाषा एंव रस :- महाकवि तुलसीदास के काव्य में सभी भावो एंव रसो का अत्यंत सफलतापूर्वक चित्रण किया गया है। तुलसीदास मानव हदय के सुक्षमातिसूक्ष्म भाव को समजने में निपुण थे
वे मानव मनोवर्तियो के सच्चे पारखी थे उन्होंने मानव जीवन के विविध पक्षों को गहराई से देखा एंव परखा था तुलसी काव्य में शांत रस के अतिरिक्त हास्य, रौद्र, विभत्स, वीर आदि रसो का भी चित्रण हुआ है।
(6) रचना शैली :- तुलसीदास ने अपने युग में प्रचलित सभी काव्य शैलियों का प्रयोग किया है।
उनके काव्य में वीर काव्य की खोजबीन शैली संत काव्य की दोहा शैली सूरदास और विद्यापति की गिनती शैली, भाट कवियों में छपी कविता आदि शैलियों के रूप देखे जा सकते हैं। इन सभी शैलियों का प्रयोग तुलसी काव्य में सफलतापूर्वक हुआ है।
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Tulsidas Ka Jivan Parichay In Hindi Or Bhasha Sheli
तुलसी के काव्य का भाव पक्ष जितना समृद्ध है कला पक्ष भी उतना ही समुन्नत एवं विकसित है। काव्य शैलियों की भांति ही तुलसीदास ने तत्कालीन सभी काव्य भाषाओ का सधिकार प्रयोग किया है।
अवधि और बृज भाषा का प्रयोग अपने काव्य में समान रूप से किया है रामचरितमानस में अवधि और “विनय पत्रिका” में ब्रिज भाषा का लिखित रूप मिलता है।
तुलसी में प्रसंगानुकूल भोजपुरी, बुंदेलखंडी, अरबी-फारसी आदि के शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने बृज एंव अवधि भाषाओं मैं संस्कृत का पुट देखकर उन्हें सुसंस्कृत बनाया है।
तत्सम शब्दों की अधिकता होने पर भी तुलसी की भाषा में कहीं क्लिष्टता नहीं है।
अलंकारों की छटा तो उनके काव्य में देखते ही बनती है उन्होंने उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक आदि अलंकारों का ही अधिक प्रयोग किया है।
अलंकारों की भांति ही तुलसीदास में छंदों का प्रयोग भी सफलतापूर्वक किया है चौपाई, दोहा, छप्पर, सौरठा, कविता, बर्वे, अवधी, संतों का प्रयोग उन्होंने अपने विभिन्न ग्रंथों में किया है।
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निष्कर्ष
गोस्वामी तुलसीदास केवल एक कवि ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और भक्त संत थे। उनकी रचनाएँ आज भी मानव जीवन को सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
रामचरितमानस के माध्यम से उन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया और हिंदी साहित्य को एक अमूल्य धरोहर प्रदान की। तुलसीदास का जीवन परिचय हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति, सरलता और सेवा भाव से समाज को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
FAQ: goswami tulsidas ka jivan parichay
Q. :- 1. Tulsidas Ke Pita Ka Naam?
Ans. :- Tulsidas Ke Pita Ka Naam Atmaram Dubey.
Q. :- 2. Tulsidas Ki Mrityu Kab Hui?
Ans. :- Tulsidas Ki Mrityu 30 July 1623 (age 111 years), Assi Ghat, Varanasi Me Hui.
Q. :- 3. Tulsidas Ke Bachpan Ka Naam?
Ans. : Tulsidas Ke Bachpan Ka Naam Ram Bhola Tha.
Q. :- 4. Tulsidas Ke Guru Kaun The?
Ans. :- Tulsidas Ke Guru Narharidas (Narharyan Andacharya) The.
Q. :- 5. Tulsidas Ka Janm Kahan Hua Tha?
Ans. :- Tulsidas Ka Janm Shravan Shukla Saptami Samvat 1554 Me Rajapur Chitrakoot District Me Hua Tha.
Q. :- 6. Tulsidas Ki Patni Ka Naam?
Ans. :- BTulsidas Ki Patni Ka Naam Ratnavati.
Q. :- 7.Tulsi Ke Pad?
Ans. :- Tulsi Ke Pad…………
1 – तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या विनय विवेक। साहस सुकृति सुसत्यव्रत, राम भरोसे एक।
2 -सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु। बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।
3 -आवत ही हरषै नहीं नैनन नहीं सनेह। तुलसी तहां न जाइये कंचन बरसे मेह।
4 – तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुं ओर।
5 – तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए।
Q. :- 8. तुलसीदास के माता पिता का नाम?
Ans. :- तुलसीदास के माता नाम हुलसी दूबे पिता का नाम आत्मा राम दूबे।
Q. :- 9. Tulsidas Wife Ka Naam?
Ans. :- Tulsidas Wife Ka Naam Ratnavati.
Q. :- 10. Tulsi Ke Ram Kya Hai?
Ans. :- तुलसी के राम पर ब्रह्म, विष्णु के अवतार और मर्यादा पुरूषोत्तम है ।
Q. :- 11. goswami tulsidas ka janm kab hua tha?
Ans. :- goswami tulsidas ka janm 1532 me hua tha.
Q. :- 12. tulsidas ke guru kaun the?
Ans. :- tulsidas ke guru Narhari Das the.
Q. :- 13. tulsidas kon the?
Ans. :- तुलसीदास (Goswami Tulsidas) मध्यकालीन भारत के एक महान संत, कवि और रामभक्ति शाखा के प्रमुख व्यक्ति थे, जो अपनी कालजयी रचना ‘रामचरितमानस’ के लिए जाने जाते हैं
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