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Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay | धर्मवीर भारती का जीवन परिचय

Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay धर्मवीर भारती का जीवन परिचय Dharmveer Bharti Biography In Hindi धर्मवीर भारती हिंदी साहित्य के उन महान साहित्यकारों में से एक थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से मानव संवेदनाओं, प्रेम, नैतिकता और समाज की जटिलताओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

“धर्मवीर भारती का जीवन परिचय” हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसंबर 1926 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में हुआ था। वे केवल एक उपन्यासकार ही नहीं, बल्कि कवि, नाटककार, पत्रकार और संपादक भी थे।

उनका प्रसिद्ध उपन्यास “गुनाहों का देवता” आज भी हिंदी के सबसे लोकप्रिय प्रेम उपन्यासों में गिना जाता है। इसके अलावा उनका नाटक “अंधा युग” आधुनिक हिंदी नाटक साहित्य की एक अमूल्य कृति है।

उन्होंने लंबे समय तक हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘धर्मयुग’ के प्रधान संपादक के रूप में कार्य किया और हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा दी।

उनकी रचनाओं में मानवीय मूल्यों, आत्मसंघर्ष और नैतिक द्वंद्व की स्पष्ट झलक मिलती है। इस लेख में हम धर्मवीर भारती के जीवन, शिक्षा, साहित्यिक योगदान और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

धर्मवीर भारती भारत के प्रसिद्ध हिंदी कवि, लेखक, नाटककार और सामाजिक चिंतक थे।

वे 1960 से 1987 तक लोकप्रिय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के मुख्य संपादक रहे।

भारती को भारत सरकार द्वारा 1972 में साहित्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

उनका उपन्यास गुनाहों का देवता एक क्लासिक बन गया।

Table of Contents

Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay

Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay
Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay – धर्मवीर भारती का जीवन परिचय
क्र.सं.विवरण (Field)जानकारी (Details)
1नामधर्मवीर भारती
2जन्म तिथि25 दिसंबर, 1926
3जन्म स्थानइलाहाबाद (अब प्रयागराज), उत्तर प्रदेश
4पिता का नामश्री चिरंजीव लाल वर्मा
5माता का नामश्रीमती चंदा देवी
6शिक्षाएम.ए. (हिंदी), पी-एच.डी. (इलाहाबाद विश्वविद्यालय)
7मुख्य विधाएँकविता, उपन्यास, नाटक, निबंध और संपादन
8प्रसिद्ध उपन्यासगुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोड़ा
9कालजयी नाटकअंधा युग (गीति-काव्य)
10कविता संग्रहकनुप्रिया, सात गीत वर्ष, ठंडा लोहा
11संपादन कार्य‘धर्मयुग’ साप्ताहिक पत्रिका (प्रसिद्ध संपादक)
12साहित्यिक आंदोलननई कविता और प्रगतिशील लेखन
13पुरस्कार व सम्मानपद्म श्री (1972), व्यास सम्मान, महाराष्ट्र भारती पुरस्कार
14वैवाहिक जीवनप्रथम पत्नी: कान्ता भारती, द्वितीय पत्नी: पुष्पलता भारती
15निधन4 सितंबर, 1997 (मुंबई)

Dharmvir Bharti Ka Jeevan Parichay

धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसंबर 1926 को इलाहाबाद के अतरसुइया मोहल्ले में हुआ। निधन 4 सितम्बर 1997 को हुआ।

उनके पिता का नाम चिरंजी लाल भारती तथा माता का नाम चंदी देवी था बचपन में ही उनके पिता का असामयिक निधन हो गया।

फलस्वरूप बालक धर्मवीर को अनेक कष्ट झेलने पड़े सन 1942 में उन्होंने कायस्त पाठशाला के इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा पास की।

इसके बाद उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया जिसके कारण उनकी पढ़ाई 1 वर्ष के लिये रुक गई।

सन 1945 में उन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से बीए की परीक्षा पास के सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के कारण इन्हें “चिंतामणिघोष” मंडल पदक मिला।

सन 1947 में उन्होंने हिंदी में m.a. की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की 1956 में उन्होंने सिद्ध साहित्य पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

और प्रयाग विश्वविद्यालय में प्राध्यापक नियुक्त हुए परंतु शीघ्र ही वे “धर्म योग” के संपादक बन गए।

सन् 1961 में उन्होंने “कॉमन वेल्थ रिलेशन कमेटी” के नियंत्रण पर इंग्लैंड की यात्रा की उन्हें पश्चिमी जर्मनी जाने का भी मौका मिला।

सन 1966 में भारतीय दूतावास के अतिथि बनकर इंडोनेशिया थाईलैंड की यात्रा की।

आगे चलकर उन्होंने भारत-पाक युद्ध के काल में बांग्लादेश की गुप्त यात्रा की और धर्म युग में युद्ध के रोमांच का वर्णन किया।

साहित्यिक सेवाओं के कारण सन 1972 में भारत सरकार ने उन्हें “पद्मश्री” से सम्मानित किया 4 सितंबर 1997 को उनका निधन हो गया।

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Dharmveer Bharati Ki Rachnaen | धर्मवीर भारती जी की प्रमुख रचनाए

Dharmveer Bharati Ki Rachnaen धर्मवीर भारती जी की प्रमुख रचनाए dharmveer bharati rachnaen धर्मवीर भारती की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है-

  1. काव्य रचनाए :- “दूसरा सप्तक की कविताए (1951), “ठंडा लोहा (1952), “सात गीत वर्ष”, “कनुप्रिया” (1959)।
  2. उपन्यास :- “गुनाहों का देवता”, “सूरज का सातवाँ घोड़ा”।
  3. गीति नाट्य :- ‘अंधा युग”।
  4. कहानी सँग्रह :- “मुर्दो का गांव”, “चाँद और टूटे हुए लोग “, “बैंड गली का आझरी मकान “।
  5. निबन्ध संग्रह :- “ठेले पर हिमालय”,” कहानी अनकहनी”, “पंश्यन्ति”, “मानव मूल्य और साहित्य”।
  6. आलोचना :- “प्रगतिवाद”, “एक समिक्षा”।
  7. एकांकी संग्रह :- “नदी प्यासी थी”।

Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay | धर्मवीर भारती जी की साहित्यिक विशेषताएं

Dharmveer Bharti धर्मवीर भारती जी की साहित्यिक विशेषताएं  –

धर्मवीर भारती स्वतंत्रता के बाद साहित्यकारों में विशेष स्थान रखते हैं उन्होंने हर उम्र और हर वर्ग के पाठकों के लिए अलग-अलग रचनाएं लिखी है।

उनके साहित्य में व्यक्ति स्वातंत्र्य, मानवीय संकट तथा रोमानी चेतना आदि प्रवृतियां देखी जा सकती हैं परंतु वे सामाजिकता और उत्तरदायित्व को अधिक महत्व देते हैं

इनके आरम्बिक काव्य में हमें रोमानी भाव देखने को मिलता है गुनाहों का देवता इन का सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यास है।

इसमें एक सरस और भावपूर्ण प्रेम कथा है “सूरज का सातवा घोडा” भी भारती जी का एक लोकप्रिय उपन्यास है  जिस पर एक हिंदी फिल्म भी बन चुकी है।

अंधा युग में कवि ने आजादी के बाद गिरते हुए जीवन मूल्यों, अनास्था, मोहभंग,विश्व युद्धों से उत्पन्न भय आदि का वर्णन किया है।

काले मेघा पानी दे भारती जी का एक प्रसिद्ध संसमरणं है जिसमें उन्होंने लोक प्रचलित विश्वास तथा विज्ञान के द्वंद का चित्रण किया है।

प्रस्तुत संस्मरण किशोर जीवन से संबंधित है इसमें दिखाया गया है कि किस प्रकार गांव के बच्चों की इंदर सेना अनावृष्टि को दूर करने के लिए द्वार द्वार पर पानी मांगती चलती है।

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dharamveer bharti ka jeevan parichay | धर्मवीर भारती जी की भाषा शैली

Dharmveer Bharti Ji आरंभ से ही सरल भाषा के पक्षपाती रहे हैं उन्होंने प्राय जन्म ज़माने की बोलचाल की भाषा का ही प्रयोग किया है।

जिसमें तत्सम, देशज तथा विदेशी शब्दावली का उपयुक्त प्रयोग किया है अपनी रचनाओं में वे उर्दू,फारसी तथा अंग्रेजी शब्दों के साथ साथ तत्भव शब्दों का भी खुलकर मिश्रण करते हैं।

विशेषकर,निबंधों में उनकी भाषा पूर्णतया साहित्य हिंदी भाषा कही जा सकती है “काले मेघा पानी दे” वस्तुतः भारती जी का एक उल्लेखनीय संस्मरण है।

जिसमें सहजता के साथ साथ आत्मीयता भी है बड़ी से बड़ी बात को वे वार्तालाप शैली में कहते हैं।

पाठकों के हत्या को छू लेते हैं अपने निबंध तथा रिपोर्ताज में उन्होंने सामान्य हिंदी भाषा का प्रयोग किया है

एक उदाहरण देखिए 

” मैं असल में था तो इन्हें मेंढक मंडली वालों की उम्र का, पर कुछ तो बचपन के आर्य समाजी संस्कार थे।

और एक कुमार सुधार सभा कायम हुई थी उसका उप मंत्री बना दिया गया था- सो समाज सुधार का जोश कुछ ज्यादा ही था।

अंधविश्वासों के खिलाफ तो तरकस में तीर रखकर घूमता रहता था”।

धर्मवीर भारती का साहित्यिक योगदान और लेखन शैली

धर्मवीर भारती आधुनिक हिंदी साहित्य के ऐसे लेखक थे, जिन्होंने भावनात्मक गहराई और सामाजिक यथार्थ को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

उनकी लेखन शैली सरल, संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण से भरपूर रही है। वे मानव मन की जटिलताओं, प्रेम, नैतिक द्वंद्व और सामाजिक मूल्यों को अपने साहित्य का केंद्र बनाते थे।

उनका प्रसिद्ध उपन्यास “गुनाहों का देवता” हिंदी साहित्य में प्रेम और त्याग का प्रतीक माना जाता है। यह कृति आज भी युवाओं और साहित्य प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

वहीं, उनका नाटक “अंधा युग” महाभारत की पृष्ठभूमि में लिखा गया एक प्रतीकात्मक नाटक है, जो आधुनिक समाज की नैतिक गिरावट और युद्ध की विभीषिका को दर्शाता है।

धर्मवीर भारती की रचनाओं में आदर्शवाद और यथार्थवाद का सुंदर संतुलन देखने को मिलता है। वे केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक जागरूक चिंतक भी थे, जिन्होंने अपने लेखन के माध्यम से समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

धर्मवीर भारती और हिंदी पत्रकारिता

साहित्य के साथ-साथ धर्मवीर भारती ने हिंदी पत्रकारिता में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे लंबे समय तक प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ के प्रधान संपादक रहे।

उनके संपादन काल में ‘धर्मयुग’ ने साहित्य, कला और सामाजिक विषयों पर गंभीर और गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्रस्तुत की।

उनकी संपादकीय दृष्टि ने हिंदी पत्रकारिता को नई पहचान दी और कई युवा लेखकों को मंच प्रदान किया। इसी कारण धर्मवीर भारती को साहित्य और पत्रकारिता — दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सम्मान प्राप्त हुआ।

हिंदी साहित्य में धर्मवीर भारती का स्थान

धर्मवीर भारती का नाम हिंदी साहित्य के उन लेखकों में लिया जाता है, जिन्होंने साहित्य को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर समाज से जोड़ा। उनकी कृतियाँ आज भी पाठ्यक्रमों, शोध कार्यों और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछी जाती हैं।

उनका साहित्य समय के साथ और भी अधिक प्रासंगिक होता जा रहा है, क्योंकि उसमें मानवीय संवेदनाएँ और नैतिक प्रश्न आज भी उतने ही जीवंत हैं।

निष्कर्ष

निष्कर्षतः धर्मवीर भारती का जीवन परिचय हमें यह सिखाता है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का माध्यम भी है।

उन्होंने अपने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से हिंदी भाषा को समृद्ध किया और नई पीढ़ी के लेखकों को प्रेरणा दी। उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी अपने समय में थीं।

धर्मवीर भारती का नाम हिंदी साहित्य के इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और उनकी कृतियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

faq: dharamveer bharti ka jeevan parichay

Q. :- 1. Dharmveer Bharti Kis Yug Ke Lekhak Hai ?

Ans. :- धर्मवीर भारती आधुनिक युग के लेखक हैं।

Q. :- 2. Andha Yug Ke Lekhak Kon Hai ?

Ans. :- धर्मवीर भारती हैं।

Q. :- 3. Tahele Par Himalaya Kis Vidha Ki Rachna Hai ?

Ans. :- धर्मवीर भारती हैं।

Q. :- 4. Kanupriya Ke Lekhak Kon Hai ?

Ans. :- Kanupriya Ke Lekhak Dharmveer Bharti Hai.

Q. :- 5. Kanupriya Kiski Rachna Hai ?

Ans. :- Dharmveer Bharti Ki Hai.

Q. :- 6. धर्मवीर भारती को कौन कौन से अवार्ड मिले हैं?

Ans. :-धर्मवीर भारती को पद्म श्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार – रंगमंच – नाटककार से अवार्ड मिले हैं।

Q. :- 7. धर्मवीर भारती जी का प्रथम उपन्यास कौन – सा है?

Ans. :- धर्मवीर भारती जी का प्रथम उपन्यास “गुनाहों का देवता” है।

Q. :- 8. धर्मवीर भारती किस युग के लेखक हैं?

Ans. :- धर्मवीर भारती आधुनिक युग के लेखक हैं।

Q. :- 9. धर्मवीर भारती का साहित्य में स्थान?

Ans. :- धर्मवीर भारती (25 दिसम्बर, 1926 – 4 सितम्बर, 1997) आधुनिक हिन्दी साहित्य के एक प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार और सामाजिक चिंतक थे।

Q. :- 10. ठेले पर हिमालय किसकी रचना है?

Ans. :- ठेले पर हिमालय धर्मवीर भारती की रचना है।

Q. :- 11. Andha Yug Kiski Rachna Hai?

Ans. :- Andha Yug Dharmveer Bharti Ki Rachna Hai.

Q. :- 12. Dharmveer Bharti Ka Janm Kab Hua Tha?

Ans. :- Dharmveer Bharti Ka Janm 25 December 1926 Hua Tha.

Q. :- 13. कनुप्रिया किस विधा की रचना है?

Ans. :- कनुप्रिया संस्कृत नाटक विधा की रचना है।

Q. :- 14. धर्मवीर भारती किस पत्रिका के संपादक थे

Ans. :- धर्मवीर भारती धर्मयुग पत्रिका के संपादक थे।

Q. :- 15. धर्मवीर भारती किस सप्तक के कवि हैं?

Ans. :- धर्मवीर भारती दूसरे सप्तक के कवि हैं।

Q. :- 16. Bharmveer Bharti Kis Yug Ke Lekhak Hain?

Ans. :- Bharmveer Bharti Aadhunik Yug Ke Lekhak Hain.

Q. :- 17. धर्मवीर भारती की प्रमुख रचनाएँ?

Ans. :- धर्मवीर भारती की प्रमुख रचनाएँ :-

कहानी संग्रह : मुर्दों का गाँव 1946, स्वर्ग और पृथ्वी 1949 , चाँद और टूटे हुए लोग 1955, बंद गली का आखिरी मकान 1969, साँस की कलम से, समस्त कहानियाँ एक साथ।

काव्य रचनाएं : ठंडा लोहा (1952), सात गीत वर्ष (1959), कनुप्रिया(1959) सपना अभी भी (1993), आद्यन्त(1999), देशांतर (1960)।

Q. :- 18. अंधायुग किस विधा की रचना है?

Ans. :- अंधायुग हिंदी काव्य नाट विधा की रचना है।

Q. :- 19. 1972 mein dharmveer bharati ko bharat sarkar ki or se kaun sa puraskar mila?

Ans. :- 1972 mein dharmveer bharati ko bharat sarkar ki or se Padma Shri puraskar mila.

Q. :- 20. dharm yug ke lekhak hain?

Ans. :- Dharmvir Bharti dharm yug ke lekhak hain.

Q. :- 21. dharmveer bharati kis yug ke lekhak the?

Ans. :- dharmveer bharati Aadhunik Kaal yug ke lekhak the.

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एक समर्पित हिंदी कंटेंट राइटर और ब्लॉगर हैं। वे JIVAN PARICHAY के संस्थापक हैं, जहाँ वे महान व्यक्तित्वों के जीवन परिचय, जीवनी, हिंदी साहित्य और शैक्षिक लेख सरल व भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों और पाठकों को सटीक, उपयोगी और फ्रेंडली जानकारी उपलब्ध कराना है।

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