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Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay | रघुवीर सहाय का जीवन परिचय | हिंदी साहित्य के सशक्त कवि |

Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay रघुवीर सहाय हिंदी साहित्य के उन विशिष्ट रचनाकारों में से हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं और लेखन के माध्यम से समाज, राजनीति और आम आदमी की पीड़ा को सशक्त आवाज़ दी।

वे नई कविता आंदोलन के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, लोकतंत्र की विडंबनाएँ, व्यवस्था की असफलताएँ और आम नागरिक की बेचैनी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

रघुवीर सहाय केवल कवि ही नहीं, बल्कि एक प्रभावशाली पत्रकार, संपादक और विचारक भी थे। उन्होंने अपने लेखन में सत्ता और समाज के बीच के टकराव को बेबाकी से प्रस्तुत किया।

उनकी भाषा सरल होते हुए भी तीखी, व्यंग्यपूर्ण और गहन अर्थों से भरी हुई है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती है।

हिंदी कविता को आधुनिक चेतना से जोड़ने में रघुवीर सहाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उनकी कविताएँ आज भी प्रासंगिक हैं क्योंकि वे समाज की उन सच्चाइयों को उजागर करती हैं, जो समय के साथ नहीं बदलतीं।

इस लेख में हम रघुवीर सहाय का जीवन परिचय, उनका साहित्यिक योगदान, प्रमुख रचनाएँ और हिंदी साहित्य में उनके स्थान के बारे में विस्तार से जानेंगे।

रघुवीर सहाय दूसरा सप्तक बीसवीं सदी के उतरार्द्ध के एक महत्वपूर्ण कवि है।

Raghuvir Sahay Ka Janm Kab Hua इनका जन्म 9 दिसंबर, 1929 को लखनऊ में हुआ। उनके पिता हरदेव सहाय साहित्य के अध्यापक थे। सन 1951 में कवि ने लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण की।

Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay
Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay
क्र.सं.विवरण (Field)जानकारी (Details)
1नामरघुवीर सहाय
2जन्म तिथि9 दिसंबर, 1929
3जन्म स्थानलखनऊ, उत्तर प्रदेश
4पिता का नामहरदेव सहाय (साहित्य प्रेमी और शिक्षक)
5शिक्षाएम.ए. अंग्रेजी साहित्य (लखनऊ विश्वविद्यालय)
6मुख्य विधाएँकविता, कहानी, निबंध और पत्रकारिता
7पत्रकारिता करियर‘दिनमान’ (संपादक), ‘प्रतीक’, और ‘नवभारत टाइम्स’
8काव्य संग्रहसीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो
9प्रसिद्ध पुस्तकलोग भूल गए हैं (इसी पर साहित्य अकादमी मिला)
10काव्य धारानई कविता (अज्ञेय द्वारा संपादित ‘दूसरा सप्तक’ के कवि)
11विशेषतामध्यम वर्ग का चित्रण और राजनीतिक चेतना
12अनुवाद कार्यशेक्सपियर के नाटकों का सफल अनुवाद (जैसे ‘मैकबेथ’)
13पुरस्कारसाहित्य अकादमी पुरस्कार (1984)
14प्रमुख कहानी संग्रहरास्ता इधर से है, जो आदमी हम बना रहे हैं
15निधन30 दिसंबर, 1990 (नई दिल्ली)

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Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay | रघुवीर सहाय का जीवन परिचय

उनका रचना कार्य सन 1946 से ही आरंभ हो चुका था। वे आराम से ही पत्रकारिता से जुड़ गए।

1949 में उन्होंने “दैनिक नवजीवन” को अपनी सीमाएं दिल्ली आरंभ कर दी। 

सन 1951 तक वे इस दैनिक समाचार पत्र के संपादक तथा संस्कृति संवादाता के रूप में कार्य करते रहे।

परंतु इसी वर्ष हुए दिल्ली चले गए तथा ” प्रतीक ” पत्रिका के सहायक संपादक बन गए।

1953 से 1957 तक वे आकाशवाणी में का काम करते रहे। बाद में वे ” कल्पना ” पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य बन गए।

परंतु सन 1961 में वे पन : आकाशवाणी को अपनी सेवाएं देने लगे। बाद में 1967 में वे ‘ दिनमान ‘ साप्ताहिक पत्रिका से जुड़ गए।

1982 तक वे इसके प्रधान संपादक रहे, परंतु बाद में वे स्वतंत्र लेखन करने लगे। 30 दिसंबर 1990 को उनका निधन हो गया।

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Raghuvir Sahay Jivan Parichay | Raghuvir Sahay Ki Rachna

वस्तुतः रघुवीर सहाय सेन 1951 में अज्ञेय द्वारा संपादित ‘ दूसरा सप्तक ‘ के कारण प्रकाश में आए।

‘सीढ़ियों पर धूप में’ इनका पहला काव्य संग्रह है उनकी उल्लेखनीय रचनाएं हैं

‘दूसरा सप्तक ‘ 1951 मैं संकलित कविताएं ‘सीढ़ियों पर धूप में’ (1960) ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ (1967) हंसो हंसो जल्दी हंसो 1975 लोग भूल गए हैं। 

1982 कुछ पत्ते कुछ चीटियां 1989 प्रतिनिधि कविताएं 1994 रघुवीर सहाय का संपूर्ण साहित्य रघुवीर सहाय रचनावली के नाम से प्रकाशित है। 

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Raghuvir Sahay Ji Dinmaan Patrika Ke Sampadak Kab Se Kab Tak Rahe The

रघुवीर सहाय ‘दिनमान’ के प्रधान संपादक 1969 से 1982 तक रहे। उन्होंने 1982 से 1990 तक स्वतंत्र लेखन किया।

Raghuvir Sahay Ki Kavyagat Visheshta

पहले बताया जा चुका है कि रघुवीर सहाय आजीवन पत्रकारिता से जुड़े रहे। इसलिए उनकी काव्यगत रचनाओ मे राजनीतिक चेतना के अतिरिक्त आधुनिक युग की विभिन समस्याओ पर समुचित प्रकाश डाला गया हैं उनकी काव्यगत विशेषता इस प्रकार है –

(1) रघुवीर सहाय जी की काव्यगत विशेषता राजनीतिक चेतना

पत्रकारिता से जुड़े रहने के कारण रघुवीर सहाय की कविताओं में राजनीतिक चेतना सहज रूप में व्यक्त हुई हैं।

कवि ने राजनीतिक क्रूरताओं तथा गतिविधियों का सहज वर्णन किया है कवि स्वीकार करता है।

कि राजनीति ने देश को अवसरवादिता , जातिवाद , हिंसा तथा भरष्टाचार जैसी बुराईया प्रदान की है।

इस संदर्भ में कवि के काव्य में मंत्री मुसद्दी लाल लोकतंत्र के भरष्टाचार का प्रतीक है। इस लिए डॉक्टर बच्चन सिंह ने रघुवीर सहाय को पोलटिकल कवि कहा है।

देश की दयनीय दशा देख कर कवि बड़े से बड़े राजनेता का नाम लेने में संकोच नही करता है।

Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay Raghuvir Sahay Ki Kavyagat Visheshta:-

” गया वाजपेयी जी से पूछ आया देश का हॉल चाल,
पर उड़ा नही सका एक नंगी औरत को
कम्बल रेलगाड़ी में बीस अजनबियों के सामने।”

(2) रघुवीर सहाय जी की काव्यगत विशेषता सामाजिक चेतना

पत्रकार तथा संपादन होने के कारण रघुवीर सहाय के काव्य में सामाजिक चेतना भी देखी जा सकती है। कही कहीं कवि जनसाधारण का पक्षधर दिखाई देता है।

कवि ने अपनी अधिकांश कविताओं में सामाजिक विरोधी तथा अंतर्विरोध दो एवं विसंगतियों का उद्घाटन किया है।

कवि मध्यवर्गीय जीवन में दबाव और लोकतांत्रिक का जीवन की विडंबना का यथार्थ वर्णन करता है।

यही नहीं , आम आदमी के साथ खड़ा दिखाई देता है इसलिए वह कहता है –

रघुवीर सहाय की काव्यगत विशेषताएँ | Raghuvir Sahay Ki Kavyagat Visheshta:-

” मैं तुम्हें रोटी नहीं दे सकता ।
न उसके साथ खाने के लिए गम ।
न में मिट सकता हूं ईश्वर के के विषय में सब भ्रम ।”

(3) रघुवीर सहाय जी की काव्यगत विशेषता मानवीय संबंधों का वर्णन

कवि ने अपनी कुछ कविताओं में मानवीय संबंधों का वर्णन करते हुए मानवीय व्यथा के विविध आयामों पर प्रकाश डाला है कवि ने स्त्री जीवन की पीड़ा को अधिकृत किया है।

Raghuveer Sahay Jeevan Parichay In Hindi Raghuvir Sahay Ki Kavyagat Visheshta:-

” बैंक में लड़कियां ” शीर्षक कविता में कवि स्त्री तथा पुरुष के मनोविज्ञान पर प्रकाश डालता है।

इसी प्रकार ‘ चेहरा ‘ कविता में गरीब लड़की का जो वर्णन किया है वह बड़ा ही सजीवन बन पड़ा है।

“कैमरे में बंद अपाहिज ” कविता में कवि ने एक अपाहिज की पीड़ा के प्रति संवेदना व्यक्त की है ‘अपराधी से आते हैं राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधायक बक्शे हुए से जाते हैं ‘

Raghuvir Sahay Ki Bhasha Shaili | रघुवीर सहाय जी की भाषा शैली

अखबारों से जुड़े रहने के कारण रघुवीर सहाय की कविता में सहज सरल तथा बोलचाल की भाषा का प्रयोग देखा जा सकता है।

उनकी भाषा की अपनी शैली है उस में कहीं पर भी विधता का मुलम्मा नहीं चढ़ा। परंतु पिंकी बोलचाल की भाषा परिनिष्ठित हिंदी भाषा से जुड़ी हुई है।

कुछ स्थलों पर कवि संस्कृत निष्ठा शब्दों के साथ आता है उर्दू के शब्दों का मिश्रण करते हुए चलते हैं उदाहरण देखिए –

“कितने सही हैं यह गुलाब
कुछ कसे हुए और कुछ झरने झरने को

और हल्की सी हवा में और भी , जोख़्म से
निखर गया है उसका रूप है जो झरने को है।”

कवि की आरंभिक कविताओं में प्रकृति के बिंब देखे जा सकते हैं परंतु परवर्ती कविताओं में भी साधारण के जीवन के चित्र बनाते हैं।

उनकी कविताओं में नेहरू वाजपेई मोरारजी देसाई के नाम प्रत्येक रूप में प्रयुक्त हुए हैं।

आरंभ में उन्होंने छंद का निर्वाह करते हुए कविताएं लिखी परंतु आगे चलकर वे छंद मुक्त कविता करने लगे।

संक्षेप में हम यह कह सकते हैं कि भाव और भाषा दोनों पृष्ठों से रघुवीर सहाय का काव्य नई कविता से लेकर समकालीन कविता की परवर्तिया लिए हुए हैं।

उनकी कविताओं प्रेम , प्रकृति , परिवार , समाज तथा राजनीति का यथार्थ वर्णन करने में सक्षम रही है।

निष्कर्ष

निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि रघुवीर सहाय हिंदी साहित्य के ऐसे कवि थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को आईना दिखाया।

उनकी कविताएँ केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और राजनीतिक समझ का सशक्त माध्यम हैं।

उन्होंने साहित्य को आम जनता की समस्याओं से जोड़ा और सत्ता के विरुद्ध सवाल उठाने का साहस दिखाया।

रघुवीर सहाय का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। उनका लेखन पाठकों को सोचने, समझने और जागरूक बनने की प्रेरणा देता है।

हिंदी साहित्य में उनका योगदान अमूल्य है और वे सदैव एक जनकवि के रूप में याद किए जाते रहेंगे।

faq: Raghuvir Sahay ka Jivan Parichay

Q. :- 1. Raghuvir Sahay Ka Janm Kab Hua?

Ans. :- रघुवीर सहाय जी का जन्म 9 सितंबर 1929 को लखनऊ में हुआ।

Q. :- 2. रघुवीर सहाय की प्रमुख रचनाएं कौन – कौन सी है?

Ans. :- रचनाएँ दूसरा सप्तक, सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो (कविता संग्रह), रास्ता इधर से है (कहानी संग्रह), दिल्ली मेरा परदेश और लिखने का कारण(निबंध संग्रह) उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।

Q. :- 3. रघुवीर सहाय का साहित्य में स्थान क्या है?

Ans. :- रघुवीर सहाय ‘दूसरा सप्तक के कवियों में हैं।

Q. :- 4. रघुवीर सहाय कौन से युग के कवि हैं?

Ans. :- रघुवीर सहाय आधुनिक काल के कवि थे।

Q. :- 5. रघुवीर साहेब के पिता क्या करते थे?

Ans. :- इनके पिता श्री हरदेव सहाय लखनऊ के ‘बाँय एंग्लो बंगाली स्कूल’ में साहित्य के अध्यापक थे

Q. :- 6. रघुवीर सहाय किस साहित्यिक आंदोलन से जुड़े थे?

Ans. :- रघुवीर सहाय ‘नई कविता’ आंदोलन के एक सशक्त कवि थे और उन्हें अज्ञेय द्वारा संपादित ‘दूसरा सप्तक’ के महत्वपूर्ण कवियों में गिना जाता है।

Q. :- 7. Raghuvir Sahay Ji Dinmaan Patrika Ke Sampadak Kab Se Kab Tak Rahe The?

Ans. :- Raghuvir Sahay Ji Dinmaan Patrika Ke Sampadak 1969 Se 1982 Tak Rahe The.

Q. :- 8. रघुवीर सहाय के पिता क्या थे?

Ans. :- श्री हरदेव सहाय लखनऊ के ‘बाँय एंग्लो बंगाली स्कूल’ में साहित्य के अध्यापक थे

Q. :- 9. रघुवीर सहाय की काव्यगत विशेषताएं क्या हैं?

Ans. :- उनकी कविताओं में सामाजिक यथार्थ, लोकतंत्र की विडंबनाएं, राजनीतिक चेतना और आम आदमी की पीड़ा का सशक्त वर्णन मिलता है। उनकी भाषा सरल लेकिन व्यंग्यपूर्ण है।

Q. :- 10. Raghuvir Sahay Ka Nidhan Kab Hua?

Ans. :- Raghuvir Sahay Ka Nidhan 30 December 1990 Ko Hua.

Q. :- 11. Raghuvir Sahay Ka Janm Sthan Kahan Hai?

Ans. :- Raghuvir Sahay Ka Janm Sthan Lucknow Hai.

Q. :- 12. रघुवीर सहाय की दो रचनाएं?

Ans. :- सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो (कविता संग्रह), रास्ता इधर से है।

Q. :- 13. रघुवीर सहाय के माता पिता का नाम?

Ans. :- रघुवीर सहाय के पिता का नाम हरदेव सहाय और माता का नाम श्री मती तारामणि देवी।

Q. :- 14. Raghuvir Sahay Ki Pramukh Rachnaen?

Ans. :- Raghuvir Sahay Ki Pramukh Rachnaen :-

1. काव्य संग्रह सीढ़ियों पर धूप में 1960, आत्महत्या के विरुद्ध 1967.
2. कहानी संग्रह कैमरे में बंद अपाहिज, रास्ता इधर से है।
३. निबंध संग्रह दिल्ली मेरा परदेस, लिखने का कारण।
४. बाल कविताएं चल परियों के देश, फायदा।
५. अनुवाद शेक्सपियर के नाटक ‘मैकबेथ’ का अनुवाद, तीन हंगारी नाटक।

Q. :- 15. रघुवीर सहाय के माता का नाम?

Ans. :- रघुवीर सहाय के माता का नाम तारा देवी था‌।

Q. :- 16. रघुवीर सहाय कौन थे?

Ans. :- रघुवीर सहाय हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, पत्रकार और संपादक थे। वे नई कविता आंदोलन के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं और उनकी रचनाएँ सामाजिक व राजनीतिक चेतना से भरपूर है

Q. :- 17. रघुवीर सहाय किस साहित्यिक आंदोलन से जुड़े थे?

Ans. :- रघुवीर सहाय नई कविता आंदोलन से जुड़े थे। इस आंदोलन में व्यक्तिगत अनुभव, सामाजिक यथार्थ और आधुनिक जीवन की समस्याओं को प्रमुखता दी गई।

Q. :- 18. रघुवीर सहाय की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?

Ans. :- रघुवीर सहाय की प्रमुख काव्य कृतियों में
“आत्महत्या के विरुद्ध”, “सीढ़ियों पर धूप में”, और “लोग भूल गए हैं” प्रमुख हैं।

Q. :- 19. रघुवीर सहाय का हिंदी साहित्य में क्या स्थान है?

Ans. :- रघुवीर सहाय का हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान है। वे उन कवियों में से हैं जिन्होंने कविता को सामाजिक और राजनीतिक सवालों से जोड़ा और उसे जन–संवेदनाओं की आवाज़ बनाया।

Q. :- 20. रघुवीर सहाय की कविता की विशेषताएँ क्या हैं?

Ans. :- उनकी कविता की प्रमुख विशेषताएँ हैं –
सरल लेकिन तीखी भाषा, सामाजिक–राजनीतिक व्यंग्य, लोकतंत्र की आलोचना और आम आदमी की पीड़ा की अभिव्यक्ति।

Q. :- 21. raghuvir sahay ka janm kab hua tha?

Ans. :- raghuvir sahay ka janm December 9, 1929 hua tha?

Q. :- 22. raghuvir sahay ka janm kahan hua tha?

Ans. :- raghuvir sahay ka janm Lucknow, Uttar Pradesh, India hua tha.

Q. :- 23. raghuvir sahay ke pita ka kya naam tha?

Ans. :- raghuvir sahay ke pita ka naam HARDEV sahay tha.

Q. :- 24. रघुवीर सहाय की मृत्यु कब हुई?

Ans. :- रघुवीर सहाय की मृत्यु 30 December 1990 में हुई।

Q. :- 25. रघुवीर सहाय कौन से सप्तक के कवि हैं

Ans. :- रघुवीर सहाय दूसरा सप्तक’ के कवि हैं।

Q. :- 26. raghuvir sahay ne kis vishay se ma kiya?

Ans. :- raghuvir sahay ne English Literature vishay se ma kiya.

Q. :- 27. रघुवीर सहाय साहित्य में स्थान?

Ans. :- रघुवीर सहाय साहित्य में स्थान नई कविता’ के प्रमुख स्तंभों में से एक के रूप में है।

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एक समर्पित हिंदी कंटेंट राइटर और ब्लॉगर हैं। वे JIVAN PARICHAY के संस्थापक हैं, जहाँ वे महान व्यक्तित्वों के जीवन परिचय, जीवनी, हिंदी साहित्य और शैक्षिक लेख सरल व भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों और पाठकों को सटीक, उपयोगी और फ्रेंडली जानकारी उपलब्ध कराना है।

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