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Shyama Charan Dube Ka Jivan Parichay | जीवन, शिक्षा, योगदान

Shyama Charan Dube ka jivan parichay हिंदी साहित्य और समाजशास्त्र के क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है। वे एक प्रख्यात समाजशास्त्री, लेखक और विचारक थे, जिन्होंने भारतीय समाज, संस्कृति और ग्रामीण जीवन पर गहन अध्ययन किया।

श्यामाचरण दुबे ने अपने लेखन और शोध के माध्यम से सामाजिक संरचना, परंपराओं और आधुनिकता के संबंधों को स्पष्ट किया।

इस लेख में हम shyam charan dube ka jivan parichay, shiksha, karya, yogdan aur sahityik parichay को विस्तार से जानेंगे।

श्री श्यामाचरण दुबे ने अपने लेखन और शोध के माध्यम से सामाजिक संरचना, परंपराओं और आधुनिकता के संबंधों को स्पष्ट किया।

दुबे का नाम सामाजिक वैज्ञानिकों में बड़े आदर से लिया जाता है उन्होंने भारतीय समाज की बदलती परिस्थितियों पर जमकर लिखा है।

ऐसे गंभीर चिंतक का जन्म सन 1922 में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा स्थानीय पाठशाला में प्राप्त की।

बाद में उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से मानव – विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है वे भारत के अग्रणी सामाजिक-वैज्ञानिक रहे है उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया।

तथा अनेक महत्वपूर्ण पदों पर भी सफलतापूर्वक कार्य किया इसके साथ ही आजीवन लेखन कार्य किया। इसके साथ ही आजीवन लेखन-कार्य भी किया, ऐसे महान लेखक का निधन सन 1996 में हुआ।

क्र.सं.विवरण (Field)जानकारी (Details)
1नामश्यामाचरण दुबे (S.C. Dube)
2जन्म तिथि25 जुलाई, 1922
3जन्म स्थानमध्य प्रदेश (बुंदेलखंड क्षेत्र)
4शिक्षाएम.ए. (नागपुर विश्वविद्यालय), पी-एच.डी.
5व्यवसायप्रसिद्ध समाजशास्त्री, मानवविज्ञानी और लेखक
6मुख्य विधाएँसांस्कृतिक अध्ययन, समाजशास्त्र, निबंध
7प्रसिद्ध निबंधउपभोक्तावाद की संस्कृति (Consumerism Culture)
8प्रमुख पुस्तक (अंग्रेजी)Indian Village (भारतीय ग्राम)
9हिंदी कृतियाँमानव और संस्कृति, संस्कृति और शिक्षा, समय और संस्कृति
10पदभारकुलपति (जम्मू विश्वविद्यालय), भारतीय समाजशास्त्र परिषद के अध्यक्ष
11लेखन शैलीतार्किक, विश्लेषणात्मक और सरल भाषा
12प्रमुख योगदानभारतीय गाँवों के जीवन और संस्कृति का वैज्ञानिक अध्ययन
13विचारधाराआधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन के पक्षधर
14पुरस्कार व सम्मानविभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सम्मान
15निधन4 मार्च, 1996
Shyama Charan Dubey Ka Jeevan Parichay
shyama charan dubey photo

Table of Contents

डॉ. श्यामाचरण दुबे ने अपने लेखन और शोध के माध्यम से सामाजिक संरचना, परंपराओं और आधुनिकता के संबंधों को स्पष्ट किया।

दुबे का जीवन परिचय | Shyama Charan Dube Ka Jeevan Parichay

श्यामाचरण दुबे ने अपने लेखन और शोध के माध्यम से सामाजिक संरचना, परंपराओं और आधुनिकता के संबंधों को स्पष्ट किया।

दुबे का जन्म 25 जुलाई 1922 को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में हुआ था उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा रायपुर के एक पब्लिक स्कूल में प्राप्त की, उसके बाद नागपुर में राजनीति विज्ञान में विश्वविद्यालय की शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक पिछड़ी जनजाति/समुदाय कमार पर अपने मानवशास्त्रीय मोनोग्राफ पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

मानवशास्त्र और समाजशास्त्र में प्रतिष्ठित और व्यापक रूप से स्वीकृत अकादमिक करियर में आगे बढ़ने से पहले, उन्होंने भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के नागपुर क्षेत्रीय कार्यालय में अधीक्षक मानव विज्ञानी के रूप में कुछ समय तक काम किया।

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Shyama charan Dube ki rachnaen | श्यामाचरण दुबे की रचनाएं

डॉ. श्यामाचरण दुबे ने अनेक ग्रंथों की रचना की है उनमें से हिंदी की प्रमुख रचनाएं इस प्रकार है

मानव और संस्कृति’, ‘परंपरा और इतिहास बोध’, ‘संस्कृति तथा शिक्षा’, ‘समाज और  भविष्य’, ‘भारतीय ग्राम’, ‘संक्रमण की पीड़ा’, ‘विकास का समाजशास्त्र’, ‘समय और संस्कृति’ आदि।

Shyama charan Dubey Ki Sahityik Visheshataen | श्यामाचरण दुबे की साहित्यिक विशेषताएँ

डॉ. श्यामाचरण दुबे जहां महान समाजशास्त्री हैं, वहीं साहित्यकार भी हैं उन्होंने आजीवन अध्यापन कार्य किया।

उन्होंने अपने युग का  समाज, जीवन और संस्कृति का गहन अध्ययन किया है।  उनसे संबंधित ज्वलंत विषयों पर उनके विश्लेषण और स्थापनाए उल्लेखनीय हैं।

डॉ. श्यामाचरण दुबे ने आज के बदलते जीवन मूल्यों में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त की है।

वे परिवर्तन के विरोधी नहीं है, गलत दिशा में हो रहे परिवर्तनों का उन्हें बेहद दुख है आज के भौतिकवादी और प्रतियोगिता की अंधी दौड़ के युग में वे चाहते हैं।

कि हमें विकास तो करना चाहिए, किंतु अपनी सभ्यता और संस्कृति का मूल्य चुकाकर नहीं।

व्यक्तिगत विकास व सुख के साथ – साथ परोपकार की भावना को नहीं भूलना चाहिए।

ऐसा उनका स्पष्ट मत है भारत की जन-जातियों और ग्रामीण समुदायो पर केंद्रित उनके लेखों ने बृहत समुदाय का ध्यान आकृष्ट किया है।

वे जानते हैं कि भारत वर्ष की संस्कृति की जड़ें यहां के ग्रामीण जीवन में ही धँसी हुई है यदि हम अपनी संस्कृति के वास्तविक रूप को देखना चाहते हैं  तो हमें ग्रामीण जीवन-शैली को समझना होगा।

डॉ. श्यामाचरण भाषा शैली | Shyama Charan Dube Ka Jeevan Parichay

श्री श्यामाचरण दुबे के साहित्य की भाषा – शैली अत्यंत सरल, सहज एवं स्वाभाविक है। वे जटिल विचारों को तार्किक विश्लेषण के साथ सहज भाषा में व्यक्त करने की कला में कुशल है।

उनकी भाषा में वाक्य – गठन अत्यंत सरल एवं और स्पष्ट है। उन्होंने लोक प्रसिद्ध मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग भी विषयानुकूल है।

faq: Shyama Charan Dubey Ka JIvan Parichay

Q. :- 1. श्यामाचरण दुबे का जन्म कब और कहां हुआ था?

Ans. :- श्यामाचरण दुबे का जन्म 25 जुलाई 1922 को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में हुआ था।

Q. :- 2. श्यामाचरण दुबे की पत्नी का नाम क्या था?

Ans. :- श्यामाचरण दुबे की पत्नी का नाम लीला दुबे।

Q. :- 3. श्यामाचरण दुबे का मूल नाम क्या था?

Ans. :- श्यामाचरण दुबे का मूल नाम श्यामाचरण दुबे था।

Q. :- 4.श्यामाचरण दुबे के अनुसार जीवन में सुख से क्या अभिप्राय है?

Ans. :- विभिन्न प्रकार के मानसिक, शारीरिक तथा सूक्ष्म आराम भी ‘सुख’ कहलाते हैं।

Q. :- 5. लेखक श्यामाचरण दुबे ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा?

Ans. :- उपभोक्‍ता संस्कृति से मानवीय संबंध कमजोर हो रहे हैं और अमीर-गरीब के बीच दूरी बढ़ने से समाज में अशांति और आक्रोश बढ़ रहा है।

Q. :- 6. shyamacharan dube ne kis vishwavidyalay se phd ki upadhi prapt ki thi?

Ans. :- shyamacharan dube ne Nagpur (University) vishwavidyalay se phd ki upadhi prapt ki thi.

Q. :- 7. shyam charan dube ne kis vishwavidyalay se phd ki upadhi prapt ki?

Ans. :- shyam charan dube ne Nagpur vishwavidyalay se phd ki upadhi prapt ki.

Q. :- 7. श्यामाचरण दुबे ने किस विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की?

Ans. :- श्यामाचरण दुबे ने नागपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

q.:- 8. shyama charan dube ka janm uttar pradesh ke banaras mein hua tha KYA?

ANS. :- नहीं, श्यामाचरण दुबे (S.C. Dube) का जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश (MP) के बुंदेलखंड क्षेत्र में सन् 1922 में हुआ था।

Q.”- 9. shyama charan dube ka janm kahan hua tha?

ANS. :- shyama charan dube ka janm Narsinghpur, Madhya Pradesh me hua tha.

दोस्तों आपको Shyama Charan Dube Ka Jivan Parichay | जीवन, शिक्षा, योगदान ये पोस्ट कैसी लगी। हमें comment करके अपने विचार दे। हमें बहुत ख़ुशी होगी। इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ Share ज़रूर करें।

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एक समर्पित हिंदी कंटेंट राइटर और ब्लॉगर हैं। वे JIVAN PARICHAY के संस्थापक हैं, जहाँ वे महान व्यक्तित्वों के जीवन परिचय, जीवनी, हिंदी साहित्य और शैक्षिक लेख सरल व भरोसेमंद भाषा में प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों और पाठकों को सटीक, उपयोगी और फ्रेंडली जानकारी उपलब्ध कराना है।

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