vishnu Khare Biography”, “विष्णु खरे कविता सार”, “Vishnu Khare books and contributions” विष्णु खरे का जीवन परिचय आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रखर, वैचारिक और सशक्त कवि के रूप में किया जाता है। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट आलोचक, अनुवादक, पत्रकार और सांस्कृतिक चिंतक भी थे।
उनकी कविताओं में समकालीन समाज, राजनीति, संस्कृति और आम जनजीवन की गहरी अनुभूति देखने को मिलती है।
हिंदी कविता को नई वैचारिक दिशा देने वाले विष्णु खरे का साहित्य आज भी पाठकों और विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
इस लेख में हम उनके जीवन, साहित्यिक योगदान और रचनात्मक विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
विष्णु खरे का जीवन परिचय आज हम आपको विष्णु खरे की जीवनी के बारे में बताएँगे और साथ ही ये आपकी पढाई के लिए अच्छा व सरल जीवन परिचय है।
Hindi Sahityakar Vishnu Khare Ka Janm Kab Hua Tha विष्णु खरे (9 फरवरी 1940 – 19 सितंबर 2018) एक भारतीय हिंदी कवि, अनुवादक, साहित्यिक और फिल्म समीक्षक, पत्रकार और पटकथा लेखक थे।
उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखा। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर अंग्रेजी साहित्य पढ़ाया और साहित्य अकादमी, भारत में राष्ट्रीय पत्र अकादमी के कार्यक्रम सचिव के रूप में कार्य किया।
Vishnu Khare Biography | Vishnu Khare books and contributions

| पूर्ण नाम (Full Name) | विष्णु खरे |
| जन्म तिथि (Date of Birth) | 9 फ़रवरी 1940 |
| जन्म स्थान (Place of Birth) | छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश, भारत |
| माता का नाम (Mother’s Name) | पलब्ध नहीं / सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं |
| पिता का नाम (Father’s Name) | पलब्ध नहीं / सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं |
| राष्ट्रीयता (Nationality) | भारतीय |
| शिक्षा (Education) | अंग्रेज़ी साहित्य में उच्च शिक्षा (विश्वविद्यालय स्तर) (उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य का गहन अध्ययन किया था) |
| मृत्यु तिथि (Date of Death) | 19 सितंबर 2018 |
| विवाह/साथी (Spouse/Partner) | पलब्ध नहीं / सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं |
| पुरस्कार/सम्मान (Awards/Honors) | 🏆 साहित्य अकादमी पुरस्कार 🏆 रघुवीर सहाय सम्मान 🏆 अन्य प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान |
| प्रमुख उपलब्धि (Major Achievement) | A. आधुनिक हिंदी कविता को वैचारिक और आलोचनात्मक दृष्टि प्रदान की b. कविता, आलोचना और अनुवाद—तीनों क्षेत्रों में समान रूप से प्रभावशाली योगदान c. समकालीन सामाजिक-राजनीतिक चेतना को कविता में मुखर रूप से प्रस्तुत किया |
| पेशा/व्यवसाय (Occupation) | कवि, साहित्यकार, आलोचक, अनुवादक, पत्रकार |
Vishnu Khare Ka Jivan Parichay | हिंदी साहित्यकार विष्णु खरे के कार्य
विष्णु खरे ने कविता के पांच संग्रह प्रकाशित किए, पठानतर (2008) नवीनतम, और आलोचना की एक पुस्तक अलोचना की पहली किताब।
वह हिंदी, अंग्रेजी, जर्मन और अन्य यूरोपीय और एशियाई भाषाओं के विपुल अनुवादक थे।
Vishnu Khare Ji Ko Kis Samman Se Sammanit Kiya Gaya Tha
खरे कई पुरस्कारों और सम्मानों के प्राप्तकर्ता थे, जिसमें फ़िनलैंड के राष्ट्रीय महाकाव्य, कालेवाला के उनके हिंदी अनुवाद के लिए ऑर्डर ऑफ़ द व्हाइट रोज़ ऑफ़ फ़िनलैंड शामिल था।
एस्टोनिया के राष्ट्रीय महाकाव्य, कालेविपोएग के हिंदी अनुवाद के लिए उन्हें एस्टोनिया सरकार द्वारा ऑर्डर ऑफ द क्रॉस ऑफ टेरा मारियाना, चतुर्थ श्रेणी से भी सम्मानित किया गया था।
उन्हें रहगुवीर सहाय सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान और शिखर सम्मान जैसे कई प्रतिष्ठित हिंदी साहित्य पुरस्कार मिले।
Vishnu Khare Ji Ko Kis Samman Se Sammanit Kiya Gaya Tha
विष्णु खरे एक कवि, आलोचक, अनुवादक तथा पत्रकार के रूप में प्रसिद्ध हैं उनका जन्म मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 9 फरवरी 1940 को हुआ।
युवावस्था में वे महाविद्यालय की पढ़ाई करने इंदौर आ गए। वहां से 1663 में क्रिस्चियन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में उन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री ली।
कुछ समय के लिए वह इंदौर से प्रकाशित “दैनिक इंदौर” के उप संपादक भी रहे।
फिर बाद में उन्होंने मध्य प्रदेश तथा दिल्ली के महाविद्यालय के प्राध्यापक के रूप में अध्यापन भी किया।
विष्णु खरे ने दुनिया के पूर्ण कवियों की कविताओं के चयन और अनुवाद का विशिष्ट कार्य किया है।
जिसके जरिए अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में प्रतिष्ठित विशेषता कवियों की रचनाओं का स्वर और मर्म भारतीय पाठक समूह तक सुलभ हुआ।
विष्णु खरे नई दिल्ली में केंद्रीय साहित्य अकादमी में उप सचिव के रूप में काम करते रहे।
इसी बीच वे “नवभारत टाइम्स” से भी जुड़े पहले वे “नवभारत टाइम्स” में प्रभावी कार्यकारी संपादक के रूप में कार्य करते रहे।
परंतु बाद में लखनऊ तथा जयपुर से प्रकाशित होने वाले संस्करण के संपादक रहे।
यही नहीं वह “टाइम्स ऑफ इंडिया” में भी विशिष्ट सहायक संपादक रहे।
जवाहरलाल नेहरू स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय में भी वे दो वर्ष तक वरिष्ठ अध्यक्ष के रूप में काम करते रहे। Vishnu Khare Death 19 September 2018 को दिल्ली में हुई।
विष्णु खरे की प्रमुख रचनाएं | Vishnu Khare Ki Rachnaen
एक गैर रूमानी समय”, “खुद अपनी आंख”, “सबकी आवाज के पर्दे में “, “पिछले बाकी (कहानी संग्रह),
“आलोचना की पहली किताब (आलोचना), “सिनेमा पड़ने के तरीके” (सिने आलोचना), “मरु प्रदेश और
अन्य कविताए व (टी.एस.इलियट);, “यह चाकू समय” (अंतिल योझेफ);, “कालेवाला” (फ़िनलैंड का राष्ट्रीकाव्य ) (अनुमाद)।
Vishnu Khare Ji Ko Kis Saman Se Sammanit Kiya Gaya Tha – हिंदी साहित्यकार विष्णु खरे के प्रमुख पुरस्कार
विष्णु खरे को हिंदी साहित्य की सेवा के कारण अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए सर्वप्रथम उन्हें रघुवीर सहाय सम्मान मिला।
बाद में वे हिंदी अकादमी का समान, शिखर सम्मान तथा मैथिलीशरण गुप्त समान से भी सुशोभित हुए।
उन्हें फिनलैंड का राष्ट्रीय सम्मान – “नाइट ऑफ द ऑर्डर ऑफ द वाइट रोज” प्राप्त हुआ।
READ ALSO:
- vaigyanik chetna ke vahak class 9 question answer | वैज्ञानिक चेतना के वाहक कक्षा 9 प्रश्न उत्तर | NCERT हिंदी
- sawle sapno ki yaad question answer | साँवले सपनों की याद प्रश्न उत्तर | Class 9 Hindi Kshitij Chapter 4
- Jabir Hussain Ka Jeevan Parichay | डॉ. जाबिर हुसैन का जीवन परिचय | Jabir Hussain Ki Mrityu Kab Hui
- Tulsidas Ka Jivan Parichay | गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय हिंदी में
- Mahadevi Verma Ka Jivan Parichay | महादेवी वर्मा का जीवन परिचय
- 10 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi | महात्मा गांधी पर 10 पंक्तियाँ
- Raghuvir Sahay Ka Jivan Parichay | रघुवीर सहाय का जीवन परिचय | हिंदी साहित्य के सशक्त कवि |
- Dharmvir Bharti Ka Jivan Parichay | धर्मवीर भारती का जीवन परिचय
विष्णु खरे की प्रमुख रचनाएं | Vishnu Khare Jeevan Parichay
यद्यपि विष्णु खरे एक समीक्षा कथा पत्रकार के रूप में अधिक प्रसिद्ध हुए हैं लेकिन उन्होंने कवि के रूप में सफलता अर्जित की।
गद्य लेखन में वे आधुनिक युग के एक सफल साहित्यकार कहे जा सकते हैं एक फिल्म समीक्षक के रूप में उन्हें विशेष ख्याति प्राप्त हुई।
यही कारण है कि दिनमान ,नवभारत टाइम्स, दि पायोनियर, दि हिंदुस्तान, जनसत्ता, दैनिक भास्कर, हंस कथा देश, आदि पत्र-पत्रिकाओं में उनके सिनेमा विषयक अनेक लेख प्रकाशित होते रहे हैं।
वह उन विशेषज्ञों में से हैं जिन्होंने फिल्म को समाज समय और विचारधारा के आलोक में देखा और इतिहास संगीत अभिनव य निर्देशन की बारीकियों के सिलसिले में उसका विश्लेषण किया।
अपने लेखन द्वारा उन्होंने हिंदी के अभाव को पूरा करने में सफलता प्राप्त की है जिसके बारे में वे अपनी एक किताब की भूमिका में लिखते हैं-
“यह ठीक है कि अब भारत में भी सिनेमा के महत्व और शास्त्त्रियत्ता को पहचान लिया गया है और उसके सिद्धांत कर भी उभर आए है।
लेकिन दुर्भाग्यवश जितना गंभीर काम हमारे सिनेमा पर यूरोप और अमेरिका में हो रहा है शायद उसका शतांश भी हमारे यहां नहीं है।
हिंदी में सिनेमा के सिद्धांतों पर शायद ही कोई अच्छी मूल पुस्तक हो।
हमारा लगभग पूरा समाज अभी भी सिनेमा जाने या देखने को एक हल्के अपराध की तरह देखता है।”
अपनी आलोचनाओं तथा लेखों में भी लेखक के बेबाक अपने मौलिक विचार व्यक्त किए हैं।
विष्णु खरे की भाषा शैली | Vishnu Khare Jeevan Parichay
विष्णु खरे की भाषा शैली इनकी भाषा साधारण बोलचाल की खड़ी – बोली को सजीव गतिशील, व्यावाहरिक बनाने इन्होने भाषा को सजीव गतिशील के लिए अन्य भाषाओं का प्रयोग किया है।
जैसे- उर्दू के शब्द अंग्रेजी के शब्द आदि एवं मुहावरो तथा कहावतों का भी प्रयोग किया है।
इनकी शैली सरल एवं सुबोध है, इनकी शैली में कोई बनावटीपन नही है क्योंकि ये सम्पादक एवं अध्यापक रहे है।
इनकी शैली के निम्नलिखित रूप है जैसे – वर्णात्मक शैली, भावाताक शैली, हास्य व्यंग्यात्मक शैली, और आलोचनात्मक शैली।
READ ALSO:
- 10 lines on apj abdul kalam in hindi | APJ Abdul Kalam पर 10 पंक्तियाँ हिंदी में
- APJ Abdul Kalam Ka Jivan Parichay | एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय हिंदी में
- गांधी जी का जीवन परिचय हिंदी में pdf | Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay pdf
- ravindra nath tagore ka jivan parichay | रविंद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय | Rabindranath Tagore Biography in Hindi
- Shyama Charan Dube Ka Jivan Parichay | जीवन, शिक्षा, योगदान
- Razia Sajjad Zaheer Biography in Hindi | रजिया सज्जाद जहीर का जीवन परिचय
- महात्मा गांधी की जीवनी | अहिंसा के पुत्र से भारत के बापू तक – पूरी कहानी हिंदी में | Mahatma Gandhi Ka Jivan Parichay
FAQ: Vishnu Khare Ka Jivan Parichay
Q. :- 1. विष्णु खरे को कौन सा सम्मान मिला है?
Ans. :- नाइट ऑफ द व्हाइट रोज सम्मान, हिंदी अकादमी साहित्य सम्मान, शिखर सम्मान, रघुवीर सहाय सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
Q. :- 2. विष्णु खरे जी की मृत्यु कब हुई थी?
Ans. :- 19 सितंबर 2018.
Q. :- 3. विष्णु खरे की भाषा शैली कौन सी है?
Ans. :- इनकी शैली सरल एवं सुबोध है, इनकी शैली में कोई बनावटीपन नही है क्योंकि ये सम्पादक एवं अध्यापक रहे है।
इनकी शैली के निम्नलिखित रूप है जैसे – वर्णात्मक शैली, भावाताक शैली, हास्य व्यंग्यात्मक शैली, और आलोचनात्मक शैली।
Q. :- 4. विष्णु का संबंध किससे है?
Ans. :- विष्णु ब्रह्मांड के संरक्षक और रक्षक हैं।
Q. :- 5. विष्णु खरे किस काल के कवि हैं?
Ans. :- विष्णु खरे आधुनिक काल की कविता के कवि रहे हैं।
Q. :- 6. विष्णु खरे की प्रमुख रचनाएं कौन कौन सी है?
Ans. :- विष्णु खरे की प्रमुख रचनाएंविष्णु खरे की रचनाएं पिछला बाक़ी (1998), लालटेन जलाना (2008), काल और अवधि के दरमियान (2003), Saba Ki Avaza Ke Parde Meṃ (1994), सिनेमा समय (2018) और सिनेमा पढ़ने के तरीक़े (2006).
Q. :- 7. vishnu khare ne apna aupcharik lekhan kab shuru kiya?
ans. :- विष्णु खरे ने अपना औपचारिक लेखन बहुत कम उम्र में, लगभग 19 साल की उम्र में शुरू किया था, जब उन्होंने टी.एस. इलियट की ‘द वेस्ट लैंड’ का हिंदी में अनुवाद किया, जिसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने सराहा था
अगर आपको Vishnu Khare Ka Jivan Parichay | विष्णु खरे का जीवन परिचय, रचनाएँ व साहित्यिक योगदान हिंदी में उपयोगी लगा हो, तो इस लेख को अपने दोस्तों और छात्रों के साथ जरूर साझा करें।
ऐसे ही महान व्यक्तित्वों की जीवनी, निबंध और हिंदी साहित्य से जुड़े लेख पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को बुकमार्क करें और कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।
आप रेगुलर जीवन परिचय के बारे में पढ़ना चाहते है तो Right Side में जो Bell Show हो रही है उस पर क्लिक करके Subscribe कर ले ताकि आपको समय – समय पर Update मिलता रहे।
Thanks For Reading 🙂